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News briefing

मुंबई पुलिस ने 2,805 नकली APK बनाने के आरोपी डेवलपर को पकड़ा: 'सीनियर सिटीज़न कार्ड' से चालान तक

प्रकाशित ताज़ा घटनाक्रम 3 मिनट में पढ़ेंलेखक: Vivek Kumar
Green characters cascading across a dark screen.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Unsplash)। इसमें दिखाए गए लोग या संस्थाएं इस खबर से जुड़ी नहीं हैं।

मुंबई क्राइम ब्रांच के मुताबिक मध्य प्रदेश के 36 साल के एक डेवलपर ने सीनियर सिटीज़न कार्ड, जीवन प्रमाण पत्र, पेंशन जांच और ट्रैफ़िक चालान के नाम पर हज़ारों नकली ऐप फ़ाइलें बनाकर बेचीं। पुलिस इन्हें करीब 9,673 लोगों से हुई ठगी से जोड़ती है।

01 / क्या हुआ

मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल ने मध्य प्रदेश के 36 साल के एक सॉफ़्टवेयर डेवलपर को गिरफ़्तार किया है। UNI, MumbaiPress और The420.in ने 5 और 6 अक्टूबर 2026 को बताया कि पुलिस के मुताबिक उसने नकली Android ऐप फ़ाइलें (APK) बनाकर साइबर ठग गिरोहों को बेचीं।

  • पुलिस का कहना है कि उसने 2,805 नकली APK फ़ाइलें बनाईं, जो देश भर में करीब 9,673 लोगों से हुई ठगी से जुड़ी हैं।
  • ये फ़ाइलें सीनियर सिटीज़न कार्ड, जीवन प्रमाण पत्र, पेंशन वेरिफ़िकेशन, ट्रैफ़िक चालान और क्रेडिट कार्ड अपडेट के नाम पर बनाई गई थीं।
  • पुलिस के मुताबिक राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल और 1930 की 1,074 शिकायतें इन फ़ाइलों से जुड़ी हैं, जिनमें ₹15.75 करोड़ की रकम है। पुलिस को शक है कि इन ऐप से हुई कुल ठगी ₹150 करोड़ से ज़्यादा है, लेकिन यह सिर्फ़ अनुमान है।
  • पुलिस ने एक पेन ड्राइव, कंप्यूटर, तीन हार्ड डिस्क, एक वाई-फ़ाई राउटर और तीन फ़ोन ज़ब्त किए, और कहा कि उसने कई होस्टिंग कंपनियों से सर्वर किराये पर लिए थे।

02 / मामला कैसे शुरू हुआ

रिपोर्ट के मुताबिक 13 अगस्त को भायखला के 72 साल के एक व्यक्ति को किसी ने बैंक मैनेजर बनकर फ़ोन किया, सीनियर सिटीज़न कार्ड दिलाने की बात कही और WhatsApp पर 'Senior Citizen Card Verification' नाम की फ़ाइल भेजी। उन्होंने उसे इंस्टॉल करके अपनी निजी और डेबिट कार्ड की जानकारी भर दी, और उनके खाते से ₹5.62 लाख निकल गए। भायखला पुलिस ने मामला दर्ज किया, जो बाद में क्राइम ब्रांच के पास गया। ऐप की जांच से जांचकर्ता डेवलपर तक पहुंचे।

कोई 'कार्ड', 'सर्टिफ़िकेट' या 'चालान' कभी WhatsApp पर ऐप फ़ाइल बनकर नहीं आता।

03 / यह क्यों अहम है

आम तौर पर पुलिस फ़ोन करने वालों को या उन लोगों को पकड़ती है जिनके खातों में पैसा जाता है। यह मामला उस व्यक्ति तक पहुंचता है जिस पर कई गिरोहों को बेचा गया औज़ार बनाने का आरोप है। ये बहाने अभी खूब चल रहे हैं: नवंबर के जीवन प्रमाण पत्र सीज़न से पहले पेंशनरों को जीवन प्रमाण पत्र और सीनियर सिटीज़न कार्ड के नाम पर फ़ोन आ रहे हैं, और नकली चालान वाले मैसेज भी घूम रहे हैं।

इंस्टॉल होने और परमिशन मिलने के बाद ऐसे ऐप बैंक OTP समेत SMS पढ़कर ठगों को भेज सकते हैं, जैसा हमारी APK मैलवेयर गाइड में बताया गया है।

04 / क्या पुष्टि हुई, क्या दावा है

रिपोर्ट (मुंबई पुलिस के हवाले से मीडिया): गिरफ़्तारी, 2,805 फ़ाइलें, 9,673 लोग, 1,074 शिकायतें और ₹15.75 करोड़, ज़ब्ती, और भायखला का मामला। ₹150 करोड़ से ज़्यादा का आंकड़ा पुलिस का शक है, कोई नतीजा नहीं। हमें मुंबई पुलिस की कोई प्रेस रिलीज़ नहीं मिली, इसलिए ये मीडिया में छपे पुलिस के बयान हैं। गिरफ़्तारी एक आरोप है; आरोपी दोषी साबित नहीं हुआ है। हम उसका नाम नहीं दे रहे, क्योंकि हमारी जांची किसी आधिकारिक रिलीज़ में उसका नाम नहीं है।

05 / क्या करें

  • WhatsApp, SMS या कॉल पर भेजा गया कोई भी ऐप कभी इंस्टॉल न करें, चाहे वह कुछ भी होने का दावा करे। सरकारी सेवाएं सरकारी वेबसाइट पर या Play Store में विभाग के अपने नाम से मिलती हैं।
  • जीवन प्रमाण पत्र के लिए Jeevan Pramaan ऐप, अपना बैंक या पेंशन ऑफ़िस इस्तेमाल करें; हमारी जीवन प्रमाण पत्र स्कैम गाइड देखें।
  • ट्रैफ़िक चालान सिर्फ़ आधिकारिक ई-चालान साइट या ऐप पर देखें, मैसेज के लिंक से कभी नहीं।
  • ऐसा ऐप इंस्टॉल कर चुके हैं? फ़्लाइट मोड चालू करें, ऐप हटाएं, और बैंक को कॉल करके कार्ड, UPI और नेट बैंकिंग ब्लॉक करवाएं। फिर 1930 पर कॉल करें।
  • पैसे गए? हमारी पैसे जाने पर चेकलिस्ट देखें।

स्रोत सूची / 2026-1006-AP

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