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Analysis

फर्ज़ी नौकरी का ऑफर, असली कंपाउंड: भारतीय कैसे तस्करी का शिकार होकर दक्षिण-पूर्व एशिया के स्कैम हब में पहुंच जाते हैं

6 मिनट में पढ़ेंलेखक: Vivek Kumar
प्रतीकात्मक चित्र, जिस पर अंग्रेज़ी में लिखा है: FAKE JOBS. REAL TRAPS.

AI से बनाया गया प्रतीकात्मक चित्र। यह असली तस्वीर या दस्तावेज़ नहीं है।

रिक्रूटर थाईलैंड में IT, सेल्स या सपोर्ट की नौकरी का वादा करते हैं, फिर लोगों को सीमा पार म्यांमार, कंबोडिया और लाओस के स्कैम कंपाउंड में पहुंचा देते हैं। आंकड़े क्या बताते हैं, और परिवार नौकरी के ऑफर की जांच कैसे करें और मदद कहां से लें।

01 / "थाईलैंड में नौकरी" कैसे कंपाउंड में जाकर खत्म होती है

ऑफर आम तौर पर WhatsApp, Telegram या किसी सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए आता है। काम सुनने में आम लगता है: कस्टमर सपोर्ट, IT का काम, या "digital sales and marketing executive"। ThePrint ने 17 मई 2024 को लाओस और कंबोडिया को लेकर जिस एडवाइज़री की रिपोर्ट दी, उसमें ठीक यही पैटर्न बताया गया था: आसान इंटरव्यू और टाइपिंग टेस्ट, ऊंची सैलरी, होटल बुकिंग और आने-जाने के हवाई टिकट, और फिर थाईलैंड से लाओस के Golden Triangle Special Economic Zone में गैरकानूनी तरीके से सीमा पार कराना।

बैंकॉक में भारतीय दूतावास ने 18 जुलाई 2024 को यही रास्ता बताया। पीड़ितों को थाईलैंड की "संदिग्ध और गैर-मौजूद" IT और निवेश कंपनियों की नौकरी के ऑफर देकर ऑनलाइन या ऑफलाइन भर्ती किया जाता है, फिर गैरकानूनी तरीके से सीमा पार पड़ोसी देशों में ले जाकर स्कैम सेंटरों में काम करवाया जाता है। यांगून में भारतीय दूतावास की 4 नवंबर 2025 की एडवाइज़री कहती है कि भारतीयों को थाईलैंड के रास्ते तस्करी करके म्यांमार के म्यावाडी ले जाया जाता है, और उनकी भर्ती सिर्फ भारत से नहीं, मलेशिया और UAE से भी होती है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने फरवरी 2026 में संसद को बताया कि अंदर पहुंचने के बाद लोगों से "साइबर अपराध और दूसरी धोखाधड़ी वाली गतिविधियां" करवाई जाती हैं।

02 / समस्या कितनी बड़ी है, और आंकड़े आपस में मेल क्यों नहीं खाते

संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुमान बड़े हैं और इन्हें अनुमान की तरह ही पढ़ना चाहिए। UN मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने 20 फरवरी 2026 को जारी एक रिपोर्ट में कहा कि कम से कम 66 देशों के 3 लाख से ज़्यादा लोग दक्षिण-पूर्व एशिया में स्कैम ऑपरेशनों में बंधक हैं, 74% कंपाउंड मेकांग क्षेत्र में हैं, और रिपोर्ट में यातना, यौन हिंसा और 19 घंटे तक के काम के दिनों का ब्योरा दर्ज किया गया। UNODC और यूरोपीय संघ (EU) ने 30 जुलाई 2026 को कहा कि दक्षिण-पूर्व एशिया में 3 लाख से ज़्यादा लोगों से ज़बरदस्ती साइबर अपराध करवाया जा रहा है, 2025 के आखिर तक ये लोग करीब 80 देशों के थे, और यह मॉडल दक्षिण एशिया और दूसरे इलाकों में फैल रहा है।

भारत के अपने आंकड़े आपस में टकराते हैं, और पाठकों को यह पता होना चाहिए। 11 दिसंबर 2025 को राज्यसभा में एक जवाब में विदेश मंत्रालय ने "अब तक" छुड़ाए गए लोगों की संख्या कंबोडिया से 2,265, लाओस से 2,290 और म्यांमार से 2,165 बताई। फरवरी 2026 में लोकसभा के दो जवाबों में दिसंबर 2025 तक की साल-दर-साल तालिका दी गई, जिसका जोड़ कंबोडिया के लिए 2,533 और म्यांमार के लिए 2,168 बनता है, लेकिन उसी अवधि के लिए लाओस का 2025 का आंकड़ा 6 फरवरी के जवाब में 1,421 है और 13 फरवरी के जवाब में 1,501। The Tribune के मुताबिक 1 जून 2026 को विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि पिछले डेढ़ साल में म्यांमार के कंपाउंड से 2,400 से ज़्यादा भारतीयों को वापस लाया गया है और माना जा रहा है कि 150 से ज़्यादा अब भी फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय का अपना कहना है कि फंसे हुए भारतीयों की सही संख्या "पता नहीं है"।

इन कंपाउंड में कितने भारतीय हैं, यह कोई नहीं जानता, वह सरकार भी नहीं जो उन्हें घर वापस लाती है।

03 / कार्रवाई: असली, तारीखों के साथ, पर अधूरी

  • फरवरी 2025: OHCHR के मुताबिक थाईलैंड-म्यांमार सीमा पर एक अभियान में करीब 7,000 लोगों को छोड़ा गया। बैंकॉक दूतावास और Scroll की रिपोर्ट के मुताबिक भारत 10 और 11 मार्च 2025 को दो उड़ानों से थाईलैंड के माए सोत से 549 नागरिकों को घर लाया।
  • 20 अक्टूबर 2025: AP की रिपोर्ट के मुताबिक म्यांमार के सरकारी मीडिया ने म्यावाडी के पास KK Park पर छापे का ऐलान किया। करीब 1,500 लोग थाईलैंड पहुंचे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि भारत 6 नवंबर को 270 नागरिकों को वापस लाया, और ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के मुताबिक 10 नवंबर को 197 और लौटे।
  • छापे के बाद: 17 दिसंबर 2025 को प्रकाशित AP की एक जांच में पाया गया कि कामगार दूसरे कंपाउंड में चले गए, जिनमें से कुछ के कंबोडिया जाने की खबर है; म्यांमार की थाईलैंड से लगी सीमा पर करीब 30 कंपाउंड अब भी चल रहे हैं और Telegram पर भर्ती जारी है।
  • कंबोडिया, जनवरी 2026: ABC News ने 9 जनवरी 2026 को बताया कि वहां के अधिकारियों ने Prince Group के संस्थापक को गिरफ्तार करके चीन प्रत्यर्पित कर दिया। अमेरिका ने उन पर वायर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग की साज़िश के आरोप लगाए थे।

04 / पहले पीड़ित, संदिग्ध नहीं

इन कंपाउंड में मौजूद बहुत से लोग तस्करी के शिकार हैं, जिनसे ज़बरदस्ती धोखाधड़ी करवाई गई। OHCHR की रिपोर्ट देशों से "non-punishment principle" यानी सज़ा न देने का सिद्धांत लागू करने की अपील करती है, ताकि तस्करी के शिकार लोगों पर उन अपराधों के लिए मुकदमा न चले जो उनसे ज़बरदस्ती करवाए गए। UN मानवाधिकार प्रमुख ने चेताया कि पीड़ितों को "बहुत बार अविश्वास, कलंक और यहां तक कि और सज़ा का सामना करना पड़ता है"। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के मामले बताते हैं कि मना करने की क्या कीमत चुकानी पड़ती है: Scroll की रिपोर्ट के मुताबिक मई 2026 में चार्जशीट किए गए कंबोडिया के एक मामले में एजेंसी ने कहा कि विरोध करने वालों को बिजली के झटके दिए गए, बंद करके रखा गया और खाना-पानी नहीं दिया गया, और पहुंचते ही उनके पासपोर्ट ले लिए गए।

05 / भारत क्या कर रहा है

  • लाइसेंस: विदेश मंत्रालय ने 13 फरवरी 2025 को राज्यसभा को बताया कि उत्प्रवास अधिनियम (Emigration Act) 1983 के तहत उत्प्रवासी महासंरक्षक (Protector General of Emigrants) के लाइसेंस के बिना कोई भी भर्ती एजेंट का काम नहीं कर सकता। फरवरी 2026 के एक जवाब के मुताबिक उत्प्रवासी संरक्षक (Protector of Emigrants) के 16 दफ्तर अवैध एजेंटों को लेकर राज्यों के साथ तालमेल करते हैं।
  • अवैध एजेंटों के नाम सार्वजनिक: दिसंबर 2025 तक eMigrate पोर्टल पर 3,505 अपंजीकृत (unregistered) एजेंटों की सूची डाली जा चुकी थी। शिकायतें राज्य पुलिस और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) को भेजी जाती हैं।
  • मुकदमे: All India Radio News और Scroll के मुताबिक NIA ने लाओस (सितंबर 2024), म्यांमार (फरवरी 2026) और कंबोडिया (मई 2026) से जुड़े, धोखाधड़ी के लिए तस्करी के मामलों में चार्जशीट दाखिल की हैं।
  • एडवाइज़री: बैंकॉक, यांगून और नोम पेन्ह के भारतीय दूतावास नौकरी ढूंढने वालों से बार-बार कह चुके हैं कि कोई भी ऑफर मंज़ूर करने से पहले दूतावास के ज़रिए नियोक्ता की पुष्टि करें और भर्ती एजेंट की जांच करें।

06 / विदेश की नौकरी का ऑफर कैसे जांचें

  • एजेंट से उसका रजिस्ट्रेशन नंबर मांगें और eMigrate पर Recruiting Agent (List of Recruiting Agents, Verify RA Status) में जाकर उसे जांचें। उसी मेन्यू में अपंजीकृत एजेंसियों की सूची भी देखें।
  • वीज़ा जांचें। बैंकॉक दूतावास का कहना है कि थाईलैंड में बिना वीज़ा प्रवेश सिर्फ पर्यटन के लिए है। मई 2024 की एडवाइज़री कहती है कि टूरिस्ट वीज़ा पर्यटन के लिए होता है और उस पर वर्क परमिट जारी नहीं होते। जो ऑफर आपसे टूरिस्ट बनकर यात्रा करने को कहे, वह कानूनी नौकरी नहीं है।
  • इन बातों को खतरे का संकेत मानें: रिक्रूटर जो पहले से ही फ्लाइट और होटल का खर्च उठा दे; ऐसा नियोक्ता जिसे आप ढूंढ या जांच न सकें; ऐसा इंटरव्यू जो सिर्फ टाइपिंग टेस्ट हो; बैंकॉक में उतरकर फिर "सड़क के रास्ते" आगे जाने का प्लान।
  • यात्रा से पहले उस देश के भारतीय दूतावास को ऑफर लेटर के साथ ईमेल करें और नियोक्ता की पुष्टि करने को कहें।

07 / अगर आपका कोई अपना वहां फंसा है

  • सीधे दूतावास से संपर्क करें। यांगून दूतावास की नवंबर 2025 की एडवाइज़री में cons.yangon@mea.gov.in और +95 9 5419602 (WhatsApp, Viber, Signal) दिए गए हैं। वियनतियान दूतावास की इमरजेंसी लाइन +856 20 55536568 है। कंबोडिया और थाईलैंड के लिए नोम पेन्ह और बैंकॉक दूतावास की वेबसाइट पर दिए संपर्क इस्तेमाल करें।
  • यांगून दूतावास जो जानकारी मांगता है, वह साझा करें: पासपोर्ट और वीज़ा स्टैंप की कॉपी, एजेंट और कंपनी की जानकारी, और सही लोकेशन।
  • विदेश मंत्रालय के कांसुलर पोर्टल MADAD पर शिकायत दर्ज करें, या eMigrate पर दी गई जानकारी के मुताबिक विदेश मंत्रालय के प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र (PBSK) की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800 11 3090 पर कॉल करें।
  • जैसा यांगून दूतावास सलाह देता है, रिक्रूटर के बारे में अपनी स्थानीय पुलिस और साइबर क्राइम सेल को बताएं। जो भी पैसे लेकर छुड़वाने का दावा करे, उसे कोई पैसा न दें।

स्रोत सूची / 2026-0929-SC

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