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1930 पर शिकायत के बाद पैसा होल्ड पर है? फ्रीज़ हुआ पैसा पीड़ितों को वापस कैसे मिलता है

5 मिनट में पढ़ेंलेखक: Vivek Kumar
प्रतीकात्मक चित्र, जिस पर अंग्रेज़ी में लिखा है: FUNDS ON HOLD?

AI से बनाया गया प्रतीकात्मक चित्र। यह असली तस्वीर या दस्तावेज़ नहीं है।

होल्ड आपके पैसे को आगे जाने से रोकता है। उसे वापस नहीं लौटाता। गृह मंत्रालय के Money Restoration Module का इस्तेमाल कैसे करें, कब FIR या BNSS की धारा 503 के तहत कोर्ट के आदेश की ज़रूरत पड़ती है, लोक अदालतों का इस्तेमाल कैसे होता है, और कौन-से दस्तावेज़ तैयार रखें।

01 / "होल्ड" का मतलब क्या है

जब आप 1930 या cybercrime.gov.in पर शिकायत करते हैं, तो पुलिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 168 के साथ धारा 94 के तहत नोटिस भेजती है। ये नोटिस उन बैंकों को जाते हैं जहां आपका पैसा पहुंचा, और बैंक शिकायत में बताई गई रकम तक का पैसा होल्ड पर रख देते हैं। गृह मंत्रालय की 2 जनवरी 2026 की SOP कहती है कि यह पैसे के रास्ते की किसी भी परत पर हो सकता है।

होल्ड रिफंड नहीं है। SOP के अपने आंकड़े यह फर्क दिखाते हैं। अप्रैल 2021 से नवंबर 2025 तक ₹52,969 करोड़ के नुकसान की शिकायत हुई और ₹7,647 करोड़ अपराधियों तक पहुंचने से रोके गए, लेकिन पीड़ितों को सिर्फ ₹167 करोड़ ही लौटाए जा सके, यानी बचाई गई रकम का करीब 2.18%। यह SOP पैसा लौटाने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए लिखी गई थी।

02 / रास्ता 1: Money Restoration Module

गृह मंत्रालय ने संसद को बताया कि Money Restoration Module और एक Grievance Redressal Module अप्रैल 2026 से काम कर रहे हैं। आप mrm-ncrp.mha.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करते हैं। यह मॉड्यूल तभी काम करता है जब पैसा सच में होल्ड हुआ हो। जो पैसा पहले ही निकाला जा चुका है, उसे यह वापस नहीं दिला सकता।

  • अपनी शिकायत में दिए मोबाइल नंबर से लॉग इन करें और Raise Refund Request चुनें।
  • अपना 14 अंकों का NCRP एक्नॉलेजमेंट नंबर डालें और OTP से वेरिफाई करें।
  • अपना PAN कार्ड अपलोड करें और रिफंड के लिए बैंक खाता बताएं। जो रिक्वेस्ट ID मिले, उसे संभालकर रखें।
  • पुलिस BNSS की धारा 106(3) के तहत इंडेम्निटी बॉन्ड या नोटिस अपलोड करती है, और बैंक पैसा आपके खाते में जमा करता है।

FIR कब ज़रूरी है? SOP के तहत ₹50,000 से कम की रकम धारा 106(3) के तहत बिना FIR के लौटाई जा सकती है। ₹50,000 से ज़्यादा की रकम के लिए FIR ज़रूरी है। जून 2026 में सामने आई सरकारी जानकारी के मुताबिक, अगर किसी भी एक खाते में आपका ₹50,000 से ज़्यादा पैसा नहीं है, तो FIR या कोर्ट के आदेश की ज़रूरत नहीं है।

SOP के तहत पुलिस उस खाताधारक को, जिसके खाते में पैसा है, पैसे के बारे में सफाई देने के लिए 15 दिन तक का समय देती है। इसके बाद पैसा लौटाने के लिए SP या DCP की मंज़ूरी चाहिए, और पुलिस के आदेश के बाद बैंक के पास भुगतान के लिए 15 दिन होते हैं। आप जो इंडेम्निटी बॉन्ड साइन करते हैं, वह इस बात का वादा है कि कोर्ट के मांगने पर आप वह रकम कोर्ट में पेश करेंगे। अगर एक ही खाते पर कई पीड़ित दावा करते हैं, तो पैसा अनुपात के हिसाब से (pro rata) बांटा जाता है।

03 / रास्ता 2: BNSS की धारा 503 के तहत मजिस्ट्रेट का आदेश

BNSS की धारा 503 ने पुरानी CrPC की धारा 457 की जगह ली है। जब पुलिस की ज़ब्ती की जानकारी मजिस्ट्रेट को दी जाती है, तो यह धारा मजिस्ट्रेट को यह आदेश देने का अधिकार देती है कि संपत्ति उसके हकदार व्यक्ति को सौंपी जाए, मजिस्ट्रेट की तय शर्तों पर। SOP धारा 497 और 498 के तहत दिए गए आवेदनों को भी मान्यता देती है। कोर्ट आमतौर पर जांच अधिकारी से रिपोर्ट मंगवाता है।

अलग-अलग राज्यों में तरीका अलग है। 10 मार्च 2025 की एक अधिसूचना में कलकत्ता हाई कोर्ट ने अपने क्षेत्र के मजिस्ट्रेटों से कहा कि NCRP पर पहले से दर्ज शिकायतों के लिए FIR पर ज़ोर न दें। उन्हें पोर्टल की शिकायत और साइबर पुलिस स्टेशन की एक्शन-टेकन रिपोर्ट के आधार पर पैसा जारी करना है।

क्या वकील की ज़रूरत है? ऑनलाइन मॉड्यूल के लिए वकील ज़रूरी नहीं है। कोर्ट में आवेदन के लिए किसी वकील से सलाह लेने पर विचार करें, या अपने ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) से मुफ्त कानूनी मदद के बारे में पूछें।

04 / रास्ता 3: लोक अदालत

SOP कहती है कि जहां मुमकिन हो, राज्य और ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरणों और लोक अदालतों की सेवाएं ली जा सकती हैं। कुछ राज्य पैसा लौटाने के मामलों को एक साथ बड़ी संख्या में निपटाने के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं। तेलंगाना पुलिस ने बताया कि सितंबर 2026 की राष्ट्रीय लोक अदालत में उन्होंने 3,896 पीड़ितों को ₹42.28 करोड़ लौटाए। पूरे 2026 में, लोक अदालतों और रेस्टोरेशन मॉड्यूल को मिलाकर, उन्होंने 24,189 पीड़ितों को ₹139.68 करोड़ लौटाने की जानकारी दी। अपने साइबर पुलिस स्टेशन से पूछें कि क्या आपका मामला लिस्ट हो सकता है।

05 / सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया

डिजिटल अरेस्ट मामले में 4 अगस्त 2026 के अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने ये बातें दर्ज कीं:

  • 57 बैंक और सभी 36 राज्य व केंद्रशासित प्रदेश पैसा लौटाने की व्यवस्था में शामिल हो रहे थे।
  • 36,290 मामलों में पैसा लौटाया जा चुका था, जिसकी कुल रकम करीब ₹18.05 करोड़ थी।

इसके बाद कोर्ट ने निर्देश दिया कि:

  • सभी राज्य रेस्टोरेशन और शिकायत निवारण मॉड्यूल को चालू करें;
  • राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ऐसी योजनाएं बनाएं जिनसे पीड़ितों को पैसा वापस पाने में मदद मिले;
  • एक सरकारी कमेटी साझा देनदारी वाले मुआवज़ा ढांचे पर विचार करे।

06 / असल में कितना समय लगता है

पैसा लौटने में लगने वाले समय का कोई आधिकारिक औसत नहीं है। SOP के कदमों (खाताधारक को नोटिस, जवाब के लिए 15 दिन तक, मंज़ूरी, फिर बैंक के लिए 15 दिन) का मतलब है कि बिना किसी रुकावट वाले आवेदन में भी कई हफ्ते लगते हैं। कोर्ट का आदेश इस पर निर्भर करता है कि कोर्ट में कितना काम है।

होल्ड का मैसेज मिलते ही आवेदन करें। इंतज़ार करने से पैसा सुरक्षित नहीं रहता।

जिस व्यक्ति का खाता फ्रीज़ हुआ है, वह होल्ड को चुनौती दे सकता है। अगर वह ऐसा करता है, तो SOP के तहत 90 दिन के अंदर पुलिस या कोर्ट का कोई निर्देश न आने पर होल्ड हटाया जा सकता है, हालांकि पुलिस इसे 90 दिन तक और बढ़ा सकती है।

07 / दस्तावेज़ों की चेकलिस्ट

  • 14 अंकों का NCRP एक्नॉलेजमेंट नंबर और होल्ड का SMS या ईमेल।
  • आपके PAN कार्ड की कॉपी और रिफंड वाले खाते की डिटेल।
  • फ्रॉड वाले डेबिट दिखाने वाले बैंक स्टेटमेंट, UTR या ट्रांज़ैक्शन ID के साथ।
  • FIR की कॉपी, अगर एक खाते में ₹50,000 से ज़्यादा होल्ड है।
  • इंडेम्निटी बॉन्ड, उस फॉर्मेट में जो पुलिस आपको दे।
  • कोर्ट के लिए: पोर्टल की शिकायत, एक्शन-टेकन रिपोर्ट और एक पहचान पत्र।
  • जल्दी पैसा दिलाने का वादा करने वाले किसी भी व्यक्ति को कभी फीस न दें।

स्रोत सूची / 2026-0929-HH

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