गाइड
UPI फ्रॉड में पैसे गए? पहले एक घंटे में क्या करें और 1930 पर शिकायत कैसे करें

AI से बनाया गया प्रतीकात्मक चित्र। यह असली तस्वीर या दस्तावेज़ नहीं है।
ठगी का पैसा फ्रीज़ हो पाएगा या नहीं, यह इस पर निर्भर करता है कि आप कितनी जल्दी कदम उठाते हैं। 1930 पर कॉल करें, cybercrime.gov.in पर शिकायत करें, RBI की तय समय-सीमा के अंदर बैंक को बताएं, UPI और कार्ड ब्लॉक करें और FIR दर्ज करवाएं।
01 / पहला घंटा: जल्दी क्यों ज़रूरी है
अगर UPI स्कैम में आपके खाते से पैसे निकल गए हैं, तो अगले एक घंटे में आप जो करते हैं, वही सबसे ज़्यादा मायने रखता है। ठग चुराया हुआ पैसा तेज़ी से आगे भेज देते हैं, और जितनी जल्दी संबंधित बैंकों को इसकी खबर मिलती है, पैसा रोकने की संभावना उतनी ही बेहतर होती है। सरकार के मुताबिक 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के पीड़ितों की मदद करती है, शिकायत जल्दी दर्ज करवाकर और जहां मुमकिन हो वहां फ्रॉड वाले ट्रांज़ैक्शन फ्रीज़ करवाकर। गृह मंत्रालय के मुताबिक 31 जनवरी 2026 तक उसके Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System ने 24.65 लाख से ज़्यादा शिकायतों में ₹8,690 करोड़ से ज़्यादा की रकम बचाई थी।
पहले शिकायत करें, छानबीन बाद में। आप जितना इंतज़ार करते हैं, पैसे को आगे खिसकने का उतना ही वक्त मिलता है।
- अभी: 1930 पर कॉल करें।
- उसके तुरंत बाद: खाता, कार्ड और UPI ब्लॉक करवाने के लिए अपने बैंक की आधिकारिक हेल्पलाइन पर कॉल करें।
- उसी दिन: cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत पूरी करें या जांच लें, और एक्नॉलेजमेंट नंबर संभालकर रखें।
02 / 1930 पर कॉल और cybercrime.gov.in पर शिकायत
1930 राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन है। इसका ऑनलाइन रूप है राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, cybercrime.gov.in, जिसमें Financial Fraud की अलग श्रेणी है। सरकार के मुताबिक वहां की गई शिकायतें FIR में बदली जाती हैं और आपके राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की पुलिस उन पर आगे कार्रवाई करती है।
कॉल करने या शिकायत दर्ज करने से पहले ये जानकारी अपने सामने रखें:
- आपका बैंक, आपका खाता नंबर या UPI ID, और उससे जुड़ा फोन नंबर।
- हर डेबिट के लिए: तारीख, समय, रकम और आपके UPI ऐप या बैंक SMS से ट्रांज़ैक्शन ID या UTR।
- वह UPI ID, खाता या QR कोड जिसमें पैसा गया।
- ठग के फोन नंबर, link, ऐप के नाम और प्रोफाइल के नाम।
पोर्टल के FAQ में वे सबूत बताए गए हैं जो काम आते हैं: बैंक स्टेटमेंट, ऑनलाइन ट्रांसफर की रसीदें, ईमेल, वेबसाइट के पते, चैट, संदिग्ध के नंबर के स्क्रीनशॉट, और फोटो या वीडियो। कुछ भी गायब होने से पहले स्क्रीनशॉट ले लें, और चैट या कॉल लॉग डिलीट न करें।
03 / बैंक को बताएं, और RBI के देनदारी नियम जानें
फ्रॉड की शिकायत सीधे अपने बैंक से भी करें, और लिखित में करें (ऐप, ईमेल या ब्रांच में चिट्ठी), ताकि आपके पास समय का रिकॉर्ड रहे। ग्राहक की देनदारी RBI के 6 जुलाई 2017 के सर्कुलर से तय होती है, "Customer Protection – Limiting Liability of Customers in Unauthorised Electronic Banking Transactions" (RBI/2017-18/15)। इसके तहत बैंकों को 24x7 शिकायत के साधन देने होते हैं और तुरंत एक शिकायत नंबर के साथ जवाब देना होता है।
- ज़ीरो देनदारी अगर गलती बैंक की थी। अगर सेंध किसी तीसरे पक्ष की वजह से लगी, जिसमें न आपकी गलती थी न बैंक की, और बैंक से ट्रांज़ैक्शन की सूचना मिलने के तीन कामकाजी दिनों के अंदर आप शिकायत कर देते हैं, तब भी आपकी कोई देनदारी नहीं है।
- चार से सात कामकाजी दिन: खाते या कार्ड के प्रकार के हिसाब से आपकी देनदारी ₹5,000, ₹10,000 या ₹25,000 तक सीमित है।
- सात कामकाजी दिनों से ज़्यादा: आपकी देनदारी बैंक के बोर्ड से मंज़ूर नीति पर निर्भर करती है।
- अगर लापरवाही आपकी थी, जैसे आपने अपनी पेमेंट से जुड़ी गोपनीय जानकारी शेयर कर दी, तो शिकायत करने तक का पूरा नुकसान आपको उठाना होगा। शिकायत के बाद होने वाला कोई भी नुकसान बैंक उठाएगा।
कामकाजी दिन आपकी होम ब्रांच के शेड्यूल से गिने जाते हैं, और जिस दिन आपको सूचना मिली वह दिन नहीं गिना जाता। बैंक को आपकी शिकायत के 10 कामकाजी दिनों के अंदर विवादित रकम आपके खाते में जमा करनी होती है, और 90 दिन के अंदर शिकायत का निपटारा करना होता है। आपकी देनदारी साबित करने की ज़िम्मेदारी बैंक की है; आपको यह साबित नहीं करना कि आपकी गलती नहीं थी।
आने वाले बदलाव। 24 जून 2026 को RBI ने संशोधित निर्देश जारी किए, जो 1 जनवरी 2027 को या उसके बाद हुए ट्रांज़ैक्शन पर लागू होंगे। इनमें ज़्यादा तरह के फ्रॉड वाले इलेक्ट्रॉनिक ट्रांज़ैक्शन को सुरक्षा के दायरे में लाया गया है, शिकायत की समय-सीमा छोटी की गई है और छोटी रकम वाले फ्रॉड के लिए मुआवज़ा जोड़ा गया है।
04 / UPI और कार्ड ब्लॉक करें, फोन साफ करें और FIR दर्ज करवाएं
- अपने बैंक की हेल्पलाइन उसकी आधिकारिक वेबसाइट, ऐप या कार्ड के पीछे से लें। RBI चेतावनी देता है कि सर्च नतीजों और सोशल मीडिया पर बैंकों के नकली हेल्पलाइन नंबर मिलते हैं।
- बैंक से अपना डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग और UPI ब्लॉक करने, और हर ट्रांज़ैक्शन के लिए फ्रॉड डिस्प्यूट दर्ज करने को कहें।
- अगर किसी कॉल करने वाले के कहने पर आपने कोई ऐप इंस्टॉल किया था, तो उसे अनइंस्टॉल करें। RBI चेतावनी देता है कि ऐसे ऐप ठगों को आपके पूरे डेटा तक पहुंच दे सकते हैं। किसी दूसरे, भरोसेमंद डिवाइस से अपना UPI PIN और बैंकिंग पासवर्ड बदलें।
- FIR: I4C के e-Zero FIR पायलट के तहत, जो मई 2025 में दिल्ली में शुरू हुआ, 1930 या पोर्टल पर की गई ₹10 लाख से ज़्यादा के नुकसान वाली शिकायतें अपने-आप Zero FIR के रूप में दर्ज हो जाती हैं। इसके बाद आपके पास साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन जाकर इसे नियमित FIR में बदलवाने के लिए तीन दिन होते हैं। मार्च 2026 में गृह मंत्रालय ने बताया कि साइबर फ्रॉड की e-FIR की सुविधा दिल्ली, राजस्थान, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश, गोवा और उत्तराखंड में उपलब्ध है। बाकी जगहों पर अपना एक्नॉलेजमेंट नंबर लेकर स्थानीय साइबर सेल या पुलिस स्टेशन जाएं।
05 / आम UPI स्कैम जिन्हें पहचानना ज़रूरी है
एक नियम ज़्यादातर स्कैम पकड़ लेता है। RBI कहता है कि पैसे पाने के लिए कभी QR कोड स्कैन करने या PIN डालने की ज़रूरत नहीं होती।
- कलेक्ट रिक्वेस्ट: तथाकथित रिफंड, इनाम या खरीदार का पेमेंट एक रिक्वेस्ट के रूप में आता है। UPI PIN डालने का मतलब है पैसे बाहर भेजने की मंज़ूरी देना।
- QR कोड: आपको एक कोड भेजा जाता है और कहा जाता है कि पैसे पाने के लिए इसे स्कैन करें। स्कैन करके PIN डालते ही पैसा ठग को चला जाता है।
- स्क्रीन-शेयरिंग ऐप: नकली सपोर्ट एजेंट मदद के बहाने आपसे कोई ऐप इंस्टॉल करवाता है, फिर आपके OTP और PIN देखता रहता है।
- नकली कस्टमर केयर: आप कोई हेल्पलाइन सर्च करते हैं, ठगों का डाला हुआ नंबर मिलाते हैं, और बातों में फंसाकर आपसे पेमेंट करवा लिया जाता है या ऐप इंस्टॉल करवा लिया जाता है।
अपना UPI PIN या OTP कभी किसी से शेयर न करें, चाहे वह खुद को कोई भी बताए।
06 / आपकी चेकलिस्ट
- तुरंत 1930 पर कॉल करें।
- बैंक के आधिकारिक माध्यम से अपना कार्ड, UPI और नेट बैंकिंग ब्लॉक करवाएं।
- तीन कामकाजी दिनों के अंदर अपने बैंक को लिखित में शिकायत दें।
- cybercrime.gov.in पर Financial Fraud श्रेणी में शिकायत दर्ज करें और एक्नॉलेजमेंट नंबर सेव करें।
- ट्रांज़ैक्शन ID, स्क्रीनशॉट और चैट संभालकर रखें।
- कोई भी रिमोट-एक्सेस ऐप अनइंस्टॉल करें और अपना PIN व पासवर्ड बदलें।
- FIR या e-FIR दर्ज करवाएं।
- अगर बैंक आपकी शिकायत का निपटारा नहीं करता, तो cms.rbi.org.in पर RBI लोकपाल (Ombudsman) के पास ले जाएं। 1 जुलाई 2026 से RBI की एक नई लोकपाल योजना ने 2021 की Integrated Ombudsman Scheme की जगह ली है और शिकायत दर्ज करने की समय-सीमा छोटी कर दी है, इसलिए जल्दी कदम उठाएं — मौजूदा नियमों के लिए हमारी मनी रिकवरी गाइड देखें।
स्रोत सूची / 2026-0929-GU
- RBI — Customer Protection: Limiting Liability of Customers in Unauthorised Electronic Banking Transactions (6 Jul 2017) Primary
- RBI — Review of framework of limiting customer liability in digital transactions: Amendment Directions (24 Jun 2026) Primary
- RBI — Consumer Awareness: Cyber Threats and Frauds (28 Jan 2022) Primary
- PIB — Curbing Cyber Frauds in Digital India (8 Oct 2025) Primary
- PIB (MHA) — Indian Cyber Crime Coordination Centre, Lok Sabha reply (17 Mar 2026) Primary
- PIB (MHA) — I4C introduces e-Zero FIR initiative (19 May 2025) Primary
- National Cyber Crime Reporting Portal — FAQ Primary