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गाइड

पुलिस साइबर फ्रॉड की FIR नहीं लिख रही? e-Zero FIR, SP को लिखित शिकायत और मजिस्ट्रेट तक का रास्ता

प्रकाशित 11 मिनट में पढ़ेंलेखक: Vivek Kumar
प्रतीकात्मक चित्र, जिस पर अंग्रेज़ी में लिखा है: FIR NAHI LIKH RAHE?

AI से बनाया गया प्रतीकात्मक चित्र। यह असली तस्वीर या दस्तावेज़ नहीं है।

आप किसी भी पुलिस स्टेशन पर, खुद जाकर या ऑनलाइन, संज्ञेय अपराध की रिपोर्ट कर सकते हैं, और FIR की कॉपी मुफ़्त है। 18 राज्यों और UT में 1930 की शिकायत अपने-आप e-Zero FIR बन सकती है। थाना मना करे तो: डाक से SP, फिर मजिस्ट्रेट।

01 / छोटा जवाब

ऑनलाइन फ्रॉड में पैसे गए, और थाना FIR नहीं लिख रहा? अपने साथ हुए अपराध की रिपोर्ट करना आपका हक है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत आप किसी संज्ञेय (cognisable) अपराध की रिपोर्ट किसी भी पुलिस स्टेशन पर कर सकते हैं, फ्रॉड चाहे कहीं भी हुआ हो, खुद जाकर या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से, और FIR की कॉपी मुफ़्त मिलती है। थाना मना करे, तो अपनी शिकायत लिखित में, डाक से पुलिस अधीक्षक (SP) को भेजें। वहां से भी बात न बने, तो मजिस्ट्रेट के पास आवेदन दें।

थाने से लौटा दिया जाना रास्ते का अंत नहीं है: अगला कदम कानून खुद बताता है।

गृह मंत्रालय ने जुलाई 2026 में बताया कि 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UT) में, तय सीमा से ज़्यादा नुकसान वाली 1930 या cybercrime.gov.in की शिकायत अपने-आप e-Zero FIR बन जाती है; इसके बाद आपको तीन दिन के अंदर पुलिस स्टेशन जाना होता है। पिछले कुछ घंटों में पैसे कटे हैं? पहले 1930 पर कॉल करें; FIR बाद में भी हो सकती है। पूरे कदम हिस्सा 08 में हैं।

02 / FIR क्यों ज़रूरी है

1930 या cybercrime.gov.in पर की गई शिकायत अपने-आप में FIR नहीं है। पोर्टल के FAQ के मुताबिक साइबर क्राइम की शिकायत 'FIR में बदलने से पहले' वापस ली जा सकती है, और गृह मंत्रालय ने लोकसभा को बताया कि शिकायतों को FIR में बदलने का काम राज्य और UT की पुलिस का है। आगे के कुछ कदम FIR पर टिके हैं:

  • होल्ड हुआ पैसा वापस पाना। गृह मंत्रालय की 2 जनवरी 2026 की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत जिस मामले में पीड़ित सिर्फ़ एक हो, उसमें पुलिस ₹50,000 से कम की होल्ड रकम BNSS की धारा 106(3) के तहत पीड़ित को अंतरिम कस्टडी में दे सकती है; ₹50,000 से ज़्यादा पर यही रास्ता 'FIR के संबंध में' है। SOP कहती है कि पुलिस खाते सिर्फ़ किसी FIR या e-FIR के संबंध में ही ज़ब्त (seize) करे, और उसमें छह हाई कोर्ट के ऐसे निर्देश गिनाए गए हैं कि होल्ड पैसा लौटाते समय पोर्टल शिकायत के लिए FIR पर ज़ोर न दिया जाए। होल्ड पैसा कैसे लौटता है।
  • आगे क्या हुआ, यह जानना। BNSS के मुताबिक पुलिस को 90 दिन के अंदर, इलेक्ट्रॉनिक तरीके समेत किसी भी माध्यम से, सूचना देने वाले या पीड़ित को जांच की प्रगति बतानी होती है (धारा 193(3)(ii))।

03 / थाने में आपके अधिकार

1 जुलाई 2024 को देश के नए आपराधिक कानून लागू हुए, तब BNSS ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की जगह ली। इसकी धारा 173 से पुष्टि:

  • कोई भी पुलिस स्टेशन। संज्ञेय अपराध की सूचना पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को दी जा सकती है, 'चाहे अपराध किसी भी इलाके में हुआ हो' (धारा 173(1))। सरकार (PIB) इसे Zero FIR कहती है।
  • खुद जाकर या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से। आप बोलकर बताएं, तो अधिकारी को इसे लिखना होगा और आपको पढ़कर सुनाना होगा, फिर आप उस पर हस्ताक्षर करेंगे। इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भेजें, तो तीन दिन के अंदर आपके हस्ताक्षर करने पर इसे रिकॉर्ड में लिया जाता है। हस्ताक्षर से पहले लिखी हुई बात पढ़ें, और कुछ गलत हो तो सुधार करवाएं।
  • मुफ़्त कॉपी। दर्ज की गई सूचना की कॉपी सूचना देने वाले या पीड़ित को 'तुरंत, मुफ़्त' देनी होती है (धारा 173(2))।

संज्ञेय अपराध वह है जिसमें पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है; थाना प्रभारी मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना इसकी जांच कर सकता है। BNSS की पहली अनुसूची (First Schedule) में धोखा देकर बेईमानी से किसी को संपत्ति सौंपने के लिए उकसाने (भारतीय न्याय संहिता, BNS की धारा 318(4)) को संज्ञेय बताया गया है, जिसमें 7 साल तक की जेल और जुर्माना है; किसी और का रूप धरकर धोखा देना (cheating by personation, BNS 319(2)) भी संज्ञेय है। साधारण धोखाधड़ी (318(2)) असंज्ञेय (non-cognisable) बताई गई है। आपके मामले में कौन-सी धाराएं लगेंगी, यह पुलिस और बाद में अदालत तय करती है।

04 / e-Zero FIR: जब 1930 की शिकायत अपने-आप FIR बन जाती है

गृह मंत्रालय ने 28 जुलाई 2026 को लोकसभा को बताया कि उसने साइबर वित्तीय फ्रॉड में e-Zero FIR के लिए राज्यों और UT को एक प्लैटफ़ॉर्म दिया है। उस जवाब से पुष्टि:

  • cybercrime.gov.in या 1930 पर की गई ऐसी शिकायत, जिसमें नुकसान राज्य या UT की अपनी तय सीमा से ज़्यादा हो, अपने-आप राज्य या UT के e-Crime पुलिस स्टेशन में e-Zero FIR के रूप में दर्ज हो जाती है, फिर इलाके के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन को भेज दी जाती है।
  • इसे नियमित FIR में बदलवाने के लिए आपको तीन दिन के अंदर उस स्टेशन पर जाना होगा। PIB ने मई 2025 में बताया था कि यह प्रक्रिया BNSS की धारा 173(1) के तहत है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक सूचना पर तीन दिन में हस्ताक्षर का यही नियम है। समय-सीमा चूक जाए तो क्या होगा, इस पर हमें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली। राजस्थान के बारे में Free Press Journal ने रिपोर्ट किया कि 72 घंटे में न पहुंचने पर पुलिस नोटिस भेजेगी, और शुरुआती जांच जारी रहेगी।

कहां लागू है। 18 राज्य और UT, हर एक के शुरू होने का महीना और 28 जुलाई 2026 के जवाब में मंत्रालय के बताए e-Zero FIR के आंकड़े:

  • मई 2025: दिल्ली, 6,115।
  • नवंबर 2025: चंडीगढ़, 4,174; मध्य प्रदेश, 61।
  • जनवरी 2026: राजस्थान, 251; गोवा, 446।
  • मार्च 2026: उत्तराखंड, 552।
  • जून 2026: पश्चिम बंगाल, 10; असम, 223; ओडिशा, 27; हरियाणा, 165।
  • जुलाई 2026: गुजरात, 1; त्रिपुरा, 32; महाराष्ट्र, 131; जम्मू-कश्मीर, 39; तमिलनाडु, 8; तेलंगाना, 9; बिहार, 12; अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, 1।

हमारी गिनती में कुल 12,257; इनमें से 10,289 सिर्फ़ दिल्ली और चंडीगढ़ के हैं। पंजाब इस लिस्ट में नहीं है: The Tribune (PTI) और The Pioneer की रिपोर्ट के मुताबिक वहां की पुलिस ने 28 जुलाई 2026 को ₹5 लाख से ज़्यादा के फ्रॉड के लिए e-Zero FIR शुरू की।

सीमा इस पर निर्भर है कि आप कहां हैं। ₹10 लाख का आंकड़ा मई 2025 में दिल्ली के पायलट का था, कोई राष्ट्रीय नियम नहीं। राजस्थान पुलिस ने 23 जुलाई 2026 को बताया कि वहां सीमा ₹5 लाख से घटाकर ₹1 लाख या उससे ज़्यादा कर दी गई है। दिल्ली के बारे में The Tribune और The Indian Awaaz ने रिपोर्ट किया कि 1 नवंबर 2025 से किसी भी पुलिस स्टेशन का हेल्प डेस्क ₹1 लाख या उससे ज़्यादा के फ्रॉड पर साइबर e-FIR दर्ज कर सकता है; पहले यह सीमा ₹10 लाख थी। बाकी राज्यों और UT की आधिकारिक सीमा हमें नहीं मिली। नुकसान सीमा से कम है, या आपका राज्य लिस्ट में नहीं है? अपना एक्नॉलेजमेंट नंबर लेकर पुलिस स्टेशन जाएं और FIR मांगें। आपके राज्य के साइबर पुलिस पेज पर उसके आधिकारिक संपर्क हैं: ईमेल, और जहां उपलब्ध हो, हेल्पलाइन और पोर्टल।

05 / थाने से लौटा दिया? आगे के तीन कदम

  1. थाने में लिखित में मांगें। सबूतों की कॉपी के साथ एक छोटी लिखित शिकायत दें, उसे FIR के रूप में दर्ज करने को कहें, और रसीद के तौर पर मुहर या हस्ताक्षर वाली कॉपी वापस लें। तारीख, समय और अधिकारी का नाम नोट करें। कहा जाए कि 'जहां हुआ, वहीं जाओ'? धारा 173(1) आपको किसी भी स्टेशन पर रिपोर्ट करने देती है।
  2. SP को डाक से लिखें। थाना प्रभारी आपकी सूचना दर्ज करने से मना करे, तो धारा 173(4) के तहत आप उस सूचना का सार लिखित में, डाक से संबंधित पुलिस अधीक्षक को भेज सकते हैं। अगर SP संतुष्ट हों कि इससे संज्ञेय अपराध बनता है, तो उन्हें खुद जांच करनी होगी या अपने किसी मातहत अधिकारी को जांच का निर्देश देना होगा। स्पीड पोस्ट या रजिस्टर्ड पोस्ट से भेजें और रसीद संभालें; ज़िले या शहर की पुलिस वेबसाइट पर पता मिल जाएगा। जिन शहरों में पुलिस कमिश्नर प्रणाली है, वहां शहर की पुलिस के दफ़्तर से पूछें कि आपके इलाके के लिए धारा 173(4) की चिट्ठी किस अधिकारी को भेजनी है। हिस्सा 06 में एक चिट्ठी का नमूना है।
  3. मजिस्ट्रेट को आवेदन दें। SP भी कार्रवाई न करें, तो यही धारा मजिस्ट्रेट को आवेदन देने की इजाज़त देती है। धारा 175(3) के तहत मजिस्ट्रेट हलफ़नामे (affidavit) के साथ दिए गए आपके आवेदन पर विचार करते हैं, ज़रूरी लगे तो जांच-पड़ताल करते हैं और पुलिस की बात सुनते हैं, फिर जांच का आदेश दे सकते हैं। यह अदालत में दी जाने वाली अर्ज़ी है, इसलिए किसी वकील की मदद लेने पर विचार करें। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के मुताबिक हर महिला, चाहे उसकी आमदनी कुछ भी हो, मुफ़्त कानूनी सहायता की हकदार है, और वे लोग भी जो कानून की शर्तें पूरी करते हैं, जैसे आय की सीमा। इसकी टोल-फ़्री हेल्पलाइन 15100 है।

एक पेच समझ लें: 14 दिन की प्रारंभिक जांच। जिस अपराध में तीन साल या उससे ज़्यादा लेकिन सात साल से कम की सज़ा है, उसमें धारा 173(3) थाना प्रभारी को, कम से कम उप पुलिस अधीक्षक (DSP) रैंक के अधिकारी की पहले से अनुमति लेकर, 14 दिन के अंदर प्रारंभिक जांच (preliminary enquiry) करने देती है, ताकि देखा जा सके कि पहली नज़र में (prima facie) मामला बनता है या नहीं; मामला बनता हो तो सीधे जांच शुरू हो सकती है। यानी थोड़ा इंतज़ार कानूनन सही हो सकता है। अगर बताया जाए कि ऐसी जांच चल रही है, तो पूछें कि कौन-सी धाराएं देखी जा रही हैं और क्या DSP रैंक के अधिकारी ने इसकी मंज़ूरी दी है; तारीख नोट करें और 14 दिन बाद फ़ॉलो-अप करें। फिर उन धाराओं की सज़ा को इस दायरे से मिलाकर देखें: पहली अनुसूची में धारा 318(4) की सज़ा 7 साल तक की बताई गई है (हिस्सा 03)।

FIR की कॉपी कानूनन मुफ़्त है। FIR दर्ज करवाने या 'जल्दी करवाने' का ऑफ़र देकर पैसे मांगने वाले किसी कॉलर या एजेंट को कभी पैसे न दें।

06 / SP को चिट्ठी: यह नमूना अपने हिसाब से भरें

चिट्ठी छोटी रखें और सिर्फ़ तथ्य लिखें। कागज़ों की कॉपी लगाएं, ओरिजिनल कभी नहीं।

सेवा में: पुलिस अधीक्षक (SP), [ज़िला] [या, पुलिस कमिश्नर वाले शहर में, शहर की पुलिस ने जिस अधिकारी का नाम बताया हो], [ऑफ़िस का पता]

विषय: ऑनलाइन फ्रॉड की FIR दर्ज न करने के संबंध में: BNSS, 2023 की धारा 173(4) के तहत भेजी गई सूचना

महोदय/महोदया,

  1. [तारीख] को ऑनलाइन फ्रॉड में मेरे ₹[रकम] चले गए। [दो-तीन लाइन में: किसने, कैसे संपर्क किया, और पैसे आपके खाते से कैसे निकले।]
  2. मैंने [तारीख] को इसकी शिकायत [1930 पर / cybercrime.gov.in पर] की। एक्नॉलेजमेंट नंबर: [नंबर]।
  3. [तारीख] को मैं यह सूचना देने [पुलिस स्टेशन का नाम] गया/गई। थाना प्रभारी ने इसे दर्ज नहीं किया। [अगर कुछ कहा गया हो, तो वह लिखें।]
  4. मेरा अनुरोध है कि धारा 173(4) के तहत यह सूचना दर्ज करवाएं और मामले की जांच खुद करें या जांच का निर्देश दें, और धारा 173(2) के तहत मुझे FIR की कॉपी दिलवाएं।

संलग्न: तारीख, रकम और ट्रांज़ैक्शन रेफ़रेंस (UTR) नंबर के साथ मेरी शिकायत; बैंक स्टेटमेंट; मैसेज और पेमेंट स्क्रीन के स्क्रीनशॉट; एक्नॉलेजमेंट; [e-Zero FIR नंबर, अगर है]।

[आपका नाम], [पता], [मोबाइल नंबर], [तारीख], [हस्ताक्षर]

चिट्ठी और साथ लगाए हर कागज़ की एक कॉपी, डाक की रसीद के साथ, अपने पास रखें।

07 / क्या पुष्टि हुई, और क्या नहीं

आधिकारिक दस्तावेज़ों से पुष्टि: आपके अधिकार और आगे का रास्ता (BNSS की धारा 2, 173, 175 और 193 और उसकी पहली अनुसूची, भारत का राजपत्र); नए कानून कब लागू हुए (PIB, गृह मंत्रालय की 2024 की year-end review); पीड़ित के अधिकार के तौर पर Zero FIR और मुफ़्त कॉपी (PIB); e-Zero FIR कैसे काम करती है, 18 राज्य और UT, शुरू होने के महीने और आंकड़े (लोकसभा तारांकित प्रश्न 135, 28 जुलाई 2026); दिल्ली का ₹10 लाख वाला पायलट (PIB, 19 मई 2025); राजस्थान की ₹1 लाख की सीमा (X पर राजस्थान पुलिस); होल्ड पैसा लौटाने के लिए FIR के नियम (गृह मंत्रालय और I4C की SOP); पोर्टल शिकायत वापस लेने का नियम (NCRP FAQ); CEIR ब्लॉक फ़ॉर्म में क्या मांगा जाता है; मुफ़्त कानूनी सहायता (NALSA)। मीडिया रिपोर्ट: पंजाब की शुरुआत, ₹5 लाख की सीमा और पीड़ित को क्या बताया जाता है (The Tribune/PTI, The Pioneer); राजस्थान में 72 घंटे के बाद क्या होता है (Free Press Journal); दिल्ली में पुलिस हेल्प डेस्क पर ₹1 लाख वाली e-FIR (The Tribune, The Indian Awaaz), जिसका दिल्ली पुलिस का अपना नोटिस हमें नहीं मिला; लोकसभा के जवाब पर ऑल इंडिया रेडियो की रिपोर्ट। दावा (बताए गए मकसद, जिन्हें मापा नहीं गया): कि e-Zero FIR से जांच तेज़ होती है और पैसा वापस पाना आसान होता है (गृह मंत्रालय), और फ्रॉड का पैसा जल्दी फ़्रीज़ होता है (पंजाब और राजस्थान पुलिस, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक); लोकसभा में पूछे जाने पर मंत्रालय ने कोई आंकड़ा नहीं दिया। उपलब्ध नहीं: सभी राज्यों की सीमाओं की कोई राष्ट्रीय सूची, और FIR से इनकार के मामलों का कोई आधिकारिक आंकड़ा।

08 / अभी क्या करें

  • पिछले कुछ घंटों में पैसे कटे हैं: अभी 1930 पर कॉल करें, फिर अपने बैंक को उसके आधिकारिक नंबर पर, फिर cybercrime.gov.in पर शिकायत पूरी करें। पहले घंटे में क्या करना है, यह हमारी पैसे गए तो क्या करें वाली चेकलिस्ट और UPI फ्रॉड गाइड में है। 1930 और cybercrime.gov.in पर शिकायत कैसे करें।
  • बताया गया कि e-Zero FIR दर्ज हो गई है: तीन दिन के अंदर ID, एक्नॉलेजमेंट नंबर और सबूत लेकर साइबर पुलिस स्टेशन जाएं। पता नहीं कौन-सा स्टेशन? पंजाब पुलिस ने कहा है कि e-Zero FIR दर्ज होते ही पीड़ित को स्टेशन और जांच अधिकारी की जानकारी दी जाएगी (The Tribune/PTI, The Pioneer)। आपको यह नहीं बताया गया, तो एक्नॉलेजमेंट नंबर के साथ नज़दीकी पुलिस स्टेशन या 1930 पर पूछें।
  • शिकायत 'pending' पर अटकी है: NCRP स्टेटस का मतलब, और फ़ॉलो-अप कैसे करें।
  • पैसा होल्ड पर है: होल्ड पैसा कैसे लौटता है। जिस मामले में पीड़ित सिर्फ़ एक हो, उसमें ₹50,000 से ज़्यादा पर SOP के पुलिस वाले रास्ते में FIR चाहिए।
  • थाने ने मना कर दिया: हिस्सा 06 की चिट्ठी से SP को लिखें, फिर मजिस्ट्रेट के पास जाएं। अपने राज्य की साइबर पुलिस के संपर्क देखें।
  • फोन भी चोरी हुआ है: CEIR ब्लॉक फ़ॉर्म पुलिस शिकायत नंबर और पुलिस रिपोर्ट या FIR की कॉपी मांगता है, यानी आवेदन के लिए पुलिस शिकायत काफ़ी है। CEIR ब्लॉक, कदम-दर-कदम।
  • बैंक मदद नहीं कर रहा: बैंक को लिखित में शिकायत करें, फिर RBI Ombudsman के पास जाएं; यह पुलिस केस के साथ-साथ चलता है।
  • कोई फ़ीस लेकर FIR जल्दी करवाने या पैसा वापस दिलाने की पेशकश करे: पैसे न दें। रिकवरी असल में कैसी होती है।

स्रोत सूची / 2026-1002-ZF

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