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सरकारी टूल की गाइड

साइबर फ्रॉड की शिकायत कैसे करें: 1930 पर कॉल और cybercrime.gov.in पर शिकायत

कॉल से पहले क्या तैयार रखें, ऑनलाइन शिकायत कैसे होती है, एक्नॉलेजमेंट नंबर का मतलब क्या है, और उसके बाद पुलिस और बैंक क्या करते हैं।

चलाता है: I4C, गृह मंत्रालयजांचा गया लेखक: Vivek Kumar
प्रतीकात्मक चित्र, जिस पर अंग्रेज़ी में लिखा है: REPORT CYBER FRAUD

AI से बनाया गया प्रतीकात्मक चित्र। यह असली तस्वीर या दस्तावेज़ नहीं है।

भारत में साइबर अपराध की शिकायत के लिए एक राष्ट्रीय व्यवस्था है। राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) हर तरह के साइबर अपराध की शिकायत लेता है। ऑनलाइन गए पैसों के लिए 1930 हेल्पलाइन सबसे तेज़ रास्ता है: यह उस सिस्टम से जुड़ी है जो पुलिस को बैंकों, वॉलेट और पेमेंट कंपनियों से जोड़ता है, ताकि चोरी का पैसा आगे भेजे जाने से पहले रोका जा सके।

दोनों को गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) चलाता है। शिकायत पर कार्रवाई उस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की पुलिस करती है जहां शिकायत भेजी गई। पैसों के मामले में जल्दी सबसे ज़रूरी है: रिपोर्ट जितनी जल्दी बैंकों तक पहुंचती है, पैसा किसी खाते में रोके जा सकने की संभावना उतनी ज़्यादा होती है।

कब इस्तेमाल करें

  • आपकी मर्ज़ी के बिना UPI, कार्ड, नेट बैंकिंग या वॉलेट से पैसे निकल गए, या धोखे से आपसे पैसे भिजवाए गए: सबसे पहले 1930 पर कॉल करें।
  • कोई भी दूसरा साइबर अपराध: हैक हुए अकाउंट, ऑनलाइन उत्पीड़न, नकली प्रोफ़ाइल, सेक्सटॉर्शन, रैनसमवेयर, क्रिप्टो फ्रॉड वगैरह।
  • महिलाओं या बच्चों से जुड़ी ऑनलाइन यौन सामग्री, जिसकी शिकायत पोर्टल पर गुमनाम रूप से भी की जा सकती है।

कब यह सही टूल नहीं है

  • इमरजेंसी या अभी हो रहा अपराध: 112 पर कॉल करें।
  • संदिग्ध कॉल या मैसेज जिसमें कोई पैसा नहीं गया: इसकी रिपोर्ट संचार साथी चक्षु पर करें।
  • तुरंत FIR: पोर्टल पर की गई शिकायत FIR नहीं है। FIR दर्ज करनी है या नहीं, यह राज्य पुलिस तय करती है।

ये चीज़ें तैयार रखें

  • आपका मोबाइल नंबर (शिकायत OTP से इसी से जुड़ती है)
  • किस बैंक, वॉलेट या मर्चेंट से पैसा गया
  • आपका खाता नंबर, वॉलेट ID या UPI ID जिससे पैसा कटा
  • हर ट्रांज़ैक्शन का ट्रांज़ैक्शन ID और तारीख
  • अगर डेबिट या क्रेडिट कार्ड का गलत इस्तेमाल हुआ, तो कार्ड नंबर
  • स्क्रीनशॉट: ट्रांज़ैक्शन, चैट, कॉल करने वाले का नंबर, वेबसाइट या ऐप
  • जो कुछ भी घटना दिखाए: बैंक स्टेटमेंट, ईमेल, लिंक, रसीद

कदम-दर-कदम

  1. पैसे गए हैं तो जितनी जल्दी हो सके 1930 पर कॉल करें और ऊपर दी गई ट्रांज़ैक्शन की जानकारी दें। आपको SMS या ईमेल से एक्नॉलेजमेंट या लॉगिन ID मिलेगी।
  2. cybercrime.gov.in खोलें और Register a Complaint चुनें। पैसे गए हों तो Financial Fraud, बाकी मामलों में Other Cyber Crime, और यौन सामग्री के लिए महिला/बच्चों वाला विकल्प चुनें।
  3. अपने नाम और भारतीय मोबाइल नंबर से लॉगिन करें; उस नंबर पर OTP आएगा। अगर आप 1930 पर कॉल कर चुके हैं, तो नई शिकायत शुरू करने की बजाय मिली हुई ID से वही शिकायत पूरी करें।
  4. सबसे सही कैटेगरी और सब-कैटेगरी चुनें, फिर घटना बताएं: लगभग कब हुई, कहां, और क्या कहा या किया गया। देर से शिकायत कर रहे हैं तो वजह भी लिखें।
  5. सबूत अपलोड करें (स्क्रीनशॉट, स्टेटमेंट, रसीद)। फ़ाइलें छोटी रखें; पोर्टल पर अपलोड साइज़ की सीमा है।
  6. संदिग्ध के बारे में जो पता हो वह लिखें: फ़ोन नंबर, UPI ID, खाता नंबर, प्रोफ़ाइल लिंक, वेबसाइट।
  7. अपनी जानकारी और पहचान पत्र भरें, शिकायत प्रीव्यू करें, सबमिट करें और उसकी PDF कॉपी डाउनलोड कर लें।
  8. एक्नॉलेजमेंट नंबर संभालकर रखें। पोर्टल पर Track your Complaint से उसका स्टेटस देखें।

उसके बाद क्या होता है

  • एक्नॉलेजमेंट नंबर शिकायत का रेफ़रेंस है, FIR नंबर नहीं।
  • शिकायत चुने गए राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की साइबर पुलिस के पास जाती है। वही उसकी जांच करती है और कानून के मुताबिक FIR और जांच का फ़ैसला करती है।
  • पैसों के मामले में एक तय पुलिस अधिकारी शिकायत जांचकर संबंधित बैंकों और पेमेंट कंपनियों को भेजता है, ताकि जहां पैसा बचा हो वहां रोका जा सके।
  • रोका गया पैसा अपने आप नहीं, कानूनी प्रक्रिया से लौटता है। अप्रैल 2026 से पोर्टल पर पैसा लौटाने और फ्रीज़ या लियन लगे खातों की शिकायत के लिए मॉड्यूल हैं।
  • राज्य पुलिस SMS और ईमेल से अपडेट भेजती है। कार्रवाई से संतुष्ट न हों, तो हर राज्य के नोडल और शिकायत अधिकारी पोर्टल पर दिए गए हैं।

सीमाएं और सावधानियां

  • कोई भी पैसा वापस आने की गारंटी नहीं दे सकता। यह इस पर निर्भर है कि रिपोर्ट कितनी जल्दी बैंक तक पहुंची और पैसा कहां गया।
  • जो कोई फ़ीस लेकर आपकी 1930 शिकायत तेज़ करवाने या पैसा वापस दिलाने की बात करे, वह दूसरी ठगी कर रहा है।
  • शिकायत में झूठी जानकारी देने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
  • गुमनाम शिकायतें (सिर्फ़ महिला और बच्चों से जुड़ी सामग्री के लिए) ट्रैक नहीं की जा सकतीं। अपडेट चाहिए तो Register & Track चुनें।
  • पोर्टल ने I4C, इंटेलिजेंस ब्यूरो और दिल्ली पुलिस के नाम से आने वाले नकली ईमेल के बारे में चेतावनी दी है। असली शिकायत अपडेट कभी पैसे नहीं मांगते।

ज़रूरी नंबर

  • साइबर वित्तीय धोखाधड़ी हेल्पलाइन: 1930
  • पुलिस इमरजेंसी: 112
  • महिला हेल्पलाइन: 181

तैयार हों तो, सरकारी वेबसाइट

cybercrime.gov.in खोलें

स्रोत