मददRead in English
सरकारी टूल की गाइड
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के बाद ई-जागृति पर ऑनलाइन उपभोक्ता शिकायत कैसे करें
जब कोई विक्रेता, ऐप या सर्विस प्रोवाइडर आपको ठगे और मामला न सुलझाए: पहले मुफ़्त हेल्पलाइन, फिर ऑनलाइन उपभोक्ता आयोग। कौन-सा आयोग, कितनी फ़ीस, और क्या चाहिए।

AI से बनाया गया प्रतीकात्मक चित्र। यह असली तस्वीर या दस्तावेज़ नहीं है।
उपभोक्ता आयोग खराब सामान, खराब सेवा और अनुचित व्यापार व्यवहार की शिकायतों पर फ़ैसला करते हैं, ई-कॉमर्स साइटों, बैंकों और ऑनलाइन कोर्स बेचने वालों के खिलाफ़ भी। जनवरी 2025 से ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय, सभी आयोग एक ही पोर्टल, ई-जागृति, से काम करते हैं, जिसे उपभोक्ता मामले विभाग चलाता है।
आप बिना वकील के खुद शिकायत कर सकते हैं। उससे पहले, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) अक्सर बिना केस के ही कंपनी से मामला सुलझवा देती है।
कब इस्तेमाल करें
- किसी विक्रेता या सर्विस प्रोवाइडर ने आपसे पैसे लिए और सामान या सेवा नहीं दी, खराब सामान दिया, या बकाया रिफ़ंड नहीं दे रहा।
- कंपनी का अपना कस्टमर केयर और राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन भी मामला नहीं सुलझा पाए।
कब यह सही टूल नहीं है
- किसी ठग की आपराधिक धोखाधड़ी: 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।
- बैंक, NBFC या वॉलेट की सेवा से जुड़ी समस्या: RBI ओम्बड्समैन मुफ़्त है और अक्सर जल्दी सुलझाता है।
ये चीज़ें तैयार रखें
- बिल, रसीद और पेमेंट का सबूत
- कंपनी से हुई ईमेल, चैट और शिकायतें, और हेल्पलाइन इस्तेमाल की हो तो उसका डॉकेट नंबर
- कंपनी का नाम और पता
- आप क्या चाहते हैं: रिफ़ंड, बदलाव, मुआवज़ा
- नोटरी से प्रमाणित हलफ़नामा, जो ई-जागृति पर शिकायत के साथ ज़रूरी है
कदम-दर-कदम
- पहले राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन आज़माएं: 1915 पर कॉल करें (सुबह 8 से रात 8), 8800001915 पर WhatsApp या SMS करें, या consumerhelpline.gov.in या NCH ऐप इस्तेमाल करें। यह आपकी शिकायत कंपनी तक पहुंचाती है।
- बात न बने, तो अपने मोबाइल नंबर और ईमेल से ई-जागृति पर रजिस्टर करें और OTP से वेरिफ़ाई करें।
- आपने जितने पैसे दिए, उसके हिसाब से आयोग चुनें: ₹50 लाख तक ज़िला आयोग, ₹50 लाख से ₹2 करोड़ तक राज्य आयोग, ₹2 करोड़ से ऊपर राष्ट्रीय आयोग।
- शिकायत भरें, दस्तावेज़ और नोटरी वाला हलफ़नामा अपलोड करें, और लागू हो तो फ़ीस भरें। पोर्टल के हेल्प डॉक्यूमेंट और वीडियो हर स्क्रीन समझाते हैं।
- पोर्टल पर केस ट्रैक करें और सुनवाई में शामिल हों, जो आयोग के हिसाब से ऑनलाइन या खुद जाकर हो सकती है।
उसके बाद क्या होता है
- आयोग कंपनी को नोटिस भेजता है, दोनों पक्ष सुनता है और आदेश देता है, जिसे आप पोर्टल से डाउनलोड कर सकते हैं।
- पोर्टल की जानकारी में फ़ैसले की कोई तय तारीख नहीं दी गई है।
सीमाएं और सावधानियां
- ज़िला आयोग में ₹5 लाख तक की शिकायत मुफ़्त है। उससे ऊपर फ़ीस ₹200 से शुरू होकर रकम के साथ बढ़ती है।
- रिश्तेदार या दोस्त की ओर से शिकायत सिर्फ़ उनकी लिखित अनुमति से कर सकते हैं।
- ज़्यादा देर न करें; उपभोक्ता कानून में समस्या पैदा होने से एक समय-सीमा तय है।
ज़रूरी नंबर
- राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (सुबह 8 से रात 8): 1915
- NCH WhatsApp / SMS: 8800001915
तैयार हों तो, सरकारी वेबसाइट
ई-जागृति खोलेंजुड़ी हुई गाइड
- फेस्टिव सेल स्कैम: नकली शॉपिंग साइट, गिफ्ट link और डिलीवरी वाली चालें कैसे पहचानें
- साइबर फ्रॉड के बाद पैसा वापस कैसे मिले: असली रास्ते, असली संभावना और 'रिकवरी' स्कैम
स्रोत
दूसरे सरकारी टूलसंचार साथी — चक्षुराष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल और 1930I4C संदिग्ध खोज (सस्पेक्ट सर्च)संचार साथी — आपके नाम के मोबाइल कनेक्शनCEIR — खोया या चोरी हुआ फ़ोन ब्लॉक करेंRBI की डिजिटल लोन ऐप सूचीRBI सचेतSEBI रजिस्टर्ड सलाहकार और @valid UPI जांचRBI ओम्बड्समैन (CMS पोर्टल)आधार बायोमेट्रिक लॉकCERT-In को साइबर घटना की रिपोर्ट