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News briefing

तेलंगाना साइबर ब्यूरो ने छह राज्यों में 101 लोग पकड़े: ₹17 करोड़ से जुड़े म्यूल खाते

प्रकाशित 2 मिनट में पढ़ेंलेखक: Vivek Kumar
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प्रतीकात्मक तस्वीर (Unsplash)। इसमें दिखाए गए लोग या संस्थाएं इस खबर से जुड़ी नहीं हैं।

तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो के मुताबिक केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और पुडुचेरी से 18 महिलाओं समेत 101 लोग गिरफ़्तार हुए। ज़्यादातर ने 5% तक कमीशन के लिए अपने बैंक खाते ठग गिरोहों को किराये पर दिए थे।

01 / क्या हुआ

तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो (TGCSB) ने 23 सितंबर 2026 से शुरू हुए दो हफ़्ते के ऑपरेशन में 18 महिलाओं समेत 101 लोगों को गिरफ़्तार किया है। Telangana Today, Deccan Herald, Deccan Chronicle और The South First ने 7 अक्टूबर को ब्यूरो के हवाले से यह बताया।

  • कहां से: केरल 35, आंध्र प्रदेश 22, कर्नाटक 17, तमिलनाडु 14, तेलंगाना 12, पुडुचेरी 1। TGCSB के 100 से ज़्यादा कर्मियों की छह विशेष टीमें इसमें लगीं।
  • कौन: ब्यूरो के मुताबिक 19 एजेंट थे और 81 म्यूल खाताधारक, यानी वे लोग जिनके बैंक खातों में ठगी का पैसा आया और आगे भेजा गया।
  • दायरा: ये गिरफ़्तारियां TGCSB के सात साइबर क्राइम थानों के 51 मामलों, देश भर की 1,172 जुड़ी शिकायतों (तेलंगाना में 206) और करीब ₹17 करोड़ के फ़र्ज़ी लेनदेन से जुड़ी हैं।
  • फ़ोन, SIM कार्ड, बैंक पासबुक और चेकबुक ज़ब्त किए गए।

02 / खातों का इस्तेमाल कैसे हुआ

रिपोर्ट के मुताबिक ब्यूरो का कहना है कि ठगों ने एजेंटों और बिचौलियों के ज़रिए खाते लिए, फिर उनमें चोरी का पैसा मंगाया और ATM से निकासी, बल्क ट्रांसफ़र और विदेशी खातों से जुड़े लेनदेन से आगे भेजा। खाताधारकों और बिचौलियों को कथित तौर पर खाते से गुज़री रकम का 5% तक कमीशन मिलता था।

खाता देने वाला ही अक्सर पुलिस की पकड़ में आता है, क्योंकि खाता उसके नाम पर होता है।

भारत में ज़्यादातर साइबर ठगी का पैसा इसी तरह घूमता है। हमारी म्यूल खाता गाइड बताती है कि अपना बैंक खाता, SIM या UPI ID किराये पर देना या बेचना अपराध क्यों है, भले आपने कभी किसी पीड़ित से बात न की हो।

03 / क्या पुष्टि हुई, क्या दावा है

रिपोर्ट (कई अख़बार, सभी 7 अक्टूबर के TGCSB बयान के हवाले से): 101 गिरफ़्तारियां, राज्यवार आंकड़े, 19 एजेंट और 81 खाताधारक, 51 मामले, 1,172 जुड़ी शिकायतें, ₹17 करोड़ और 5% तक कमीशन। ब्यूरो की प्रेस रिलीज़ हमें ऑनलाइन नहीं मिली। 19 एजेंट और 81 खाताधारक मिलाकर 100 होते हैं, 101 नहीं, और रिपोर्टों में यह अंतर नहीं समझाया गया। गिरफ़्तारियां आरोप हैं; कोई दोषी साबित नहीं हुआ है। हम किसी गिरफ़्तार व्यक्ति का नाम नहीं दे रहे।

04 / क्या करें

  • अपना बैंक खाता, डेबिट कार्ड, SIM या UPI ID कभी किराये पर न दें, न बेचें, न 'उधार' दें, चाहे ऑफ़र कुछ भी हो: पार्ट-टाइम जॉब, 'गेमिंग' कमीशन या किसी दोस्त का एहसान।
  • अगर किसी को पहले ही एक्सेस दे चुके हैं, तो अभी रोकें: नेट बैंकिंग पासवर्ड और UPI PIN बदलें, कार्ड ब्लॉक करें, बैंक को लिखित में बताएं, और cybercrime.gov.in पर या नज़दीकी थाने में शिकायत करें। जल्दी सामने आना मदद करता है।
  • शिकायत के बाद खाता फ़्रीज़ हो गया है, तो हमारी फ़्रीज़ खाता गाइड पढ़ें।
  • ठगी में पैसे गए? 1930 पर कॉल करें; तेलंगाना साइबर पुलिस के संपर्क भी देखें।

स्रोत सूची / 2026-1007-TG

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